मंगलवार, 15 नवंबर 2016

दोनों सर्जिकल स्ट्राइक टॉय -टॉय फ़िस्स हो गयीं हैं!


किसी भी लोकतान्त्रिक देश की  निर्वाचित सरकार का यह उत्तरदायित्व है कि वह देश की सीमाओं की सुरक्षा के  बाजिब इंतजाम करे। इसके लिए मजबूत - चौकस सैन्यबल एवम उसके लिए पार्यप्त आधुनिकतम अश्त्र -  शस्त्र उपलब्ध कराना सरकार का परम कर्तव्य है। लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ने इस बाबत कोई क्रांतिकारी कदम नहीं उठाया। बल्कि पाकिस्तान परस्त आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसके परोक्ष युद्ध का जबाब 'पीओके'में 'आपरेशन सैन्य सर्जिकल स्ट्राइक' से देकर 'आग में घी डालने' का काम किया । उन्होंने पीओके में सैन्य सर्जिकल स्ट्राइक का ढिंढोरा पीटकर देशकी आवाम को यह जताने की फूहड़ कोशिश की , कि ''आइंदा आतंकवादी और पाकिस्तान अपनी औकात में रहेंगे। क्योंकि हमने 'पहली बार' सीमापार कर दुश्मन के घर में घुसकर, पाक-समर्थित आतंकवाद  का सफाया किया है।''लेकिन सारा संसार देख रहा है कि तथाकथित 'सैन्य सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद से सीमा पर भारतीय जवान अधिक तादाद में शहीद हो रहे हैं ! फर्क सिर्फ इतना ही आया है कि पहले पाकिस्तानी हमलावर  कुछ कम मरते थे ,लेकिन अब दोनों ओर ज्यादा मरने लगे हैं। चूँकि मोदी सरकार के सत्ता में आने और सर्जिकल इत्यादि का टोटका करने से न तो आतंकवाद खत्म हुआ और न ही पाकिस्तान काबू में आया। कश्मीर की दुर्दशा तो पहले से ज्यादा भयानक हो गयी है। यदि कोई यह सच बयान करे तो उसे देशद्रोह का तमगा हाजिर है।

ढाई साल बीत जाने के बाद जब मोदी सरकार को कालेधन और आतंकवाद पर कोई सफलता नहीं मिली तो उन्होंने 'घर में छिपे साँप को मारने के लिए घर में ही आग लगा दी'। ७-८ नवम्बर की दरम्यानी रात को उन्होंने १०००-५०० के नोटों पर बंदिश लगाकर ढिंढोरा पीट डाला कि 'भाइयो-बहिनो' देखो - हमने ''आपरेशन मौद्रिक
सर्जिकल स्ट्राइक करके हमने कालेधन वालों की ,रिश्वतखोरों की और आतंकियों का सारा धन जब्त कर लिया है !''जबकि हकीकत सामने है कि सरकार के खजाने में एक फूटी कौड़ी नहीं आयी है। बैंकों के पास अबतक जो दो लाख करोड़ रूपया जमा हुआ है वह ९९% नंबर एक की असली मुद्रा के रूप में विनिमय से प्राप्त पुरानी मुद्रा  ही है, उसमें सिर्फ १% कालाधन हो सकता है। बाकी का १२ लाख करोड़ का कालाधन कहाँ है ? मोदी सरकार की दोनों सर्जिकल स्ट्राइक टॉय -टॉय फ़िस्स हो गयीं हैं !