हमारा दुर्लभ मानव शरीर स्वर्ण पात्र के समान है। इसमें पूँजीवादी विकास की मादक मदिरा ,अधिनायकवादी सोच की प्रतिगामी जड़ता और साम्प्रदायिक सोच की अंधभक्ति का जहर भरने के बजाय,क्रांतिकारी सोच का ,नवोन्मेष जागरूकता का और समानता का अमृत भर दो !
बुधवार, 5 जुलाई 2017
रविवार, 2 जुलाई 2017
- कल पीएम मोदी जी ने अपने स्वयंभू गौ रक्षकों को मुस्कराकर डांटा था ! आज माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी महोदय ने भी भीड़ द्वारा की जा रही हिंसा पर अफसोश जताया है !कहीं यह मोदी जी की विदेश यात्रा का असर तो नही?शायद किसी विदेशी मित्र ने भारत में घटित भीड़ हिन्सा का संग्यान लिया हो .जो भी हो अब तो यही कहा जा सकता है कि- बड़ी देर कर दी मेहरवाँ आते आते ..!
- आक्रामक उद्धाम पूंजीवाद एवं बहुसंख्यक सांप्रदायिक तत्वों की असहिष्णुता ही आधुनिक भारत के नये शुम्भ -निशुम्भ हैं !इन दोनों असुरों को केवल सर्वहारा वर्ग की एकता से उत्पन्न क्रांति रूपी 'महाकाली'ही नष्ट कर सकती है!
- जो शख्स फासिज्म और केपिटलिज्म का जघन्य क्रूर इतिहास नहीं जानता ,जो शख्स विश्व की महत्वपूर्ण क्रांतियों का इतिहास नही जानता ,वो राजनीति का ककहरा भी नही जानता !वह धर्म मजहब की जाnakri का कितना ही ढ़ोंग करे किंतु वह किसी के साथ भी न्याय नही कर सकता !
- जीएसटी के ढ़ेरों फायदे जानने के लिये ZEE NEWS देखें !
जीएसटी कितना भयानकहै,यह जानने केलिये NDTV देखें !
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