कुछ टीवी चैनल्स और प्रिंट मीडिया वाले खबरें दे रहे हैं कि मोदी सरकार के दो साल का कामकाज बेहतर रहा। उनके सर्वे [!] के अनुसार देश के ६२% लोग मोदी सरकार के कामकाज से खुश हैं। इस प्रायोजित प्रचार के दो बड़े निहतार्थ हो सकते हैं। एक तो यह कि मोदी सरकार का कामकाज देश के बहुमत जन को पंसद है। दूसरा यह कि देश की जनता को वह दिख भी रहा है। सवाल यह उठता है कि जब जनता के बहुमत [६२%] ने तस्दीक कर दिया है कि सरकार खूब काम कर रही है और अच्छे दिन आ गए हैं तो करोड़ों रूपये खर्च करके 'दो साल की उपलब्धियों' का ढिंढोरा पीटने की क्या जरुरत आ पडी है ? क्या पिछलग्गू मीडिया के प्रायोजित सर्वे पर उन्हें विश्वास नहीं ? क्या वे देश की जनता को मूर्ख समझते हैं और इसलिए यह बताने जा रहे हैं कि ;-
हे भारत वासियो ! यह राष्ट्र अब भय,भूंख,भृष्टाचार,सूखा,अकाल,शोषण-उत्पीड़न और आतंकवाद से मुक्त हो चुका है !आइन्दा इसे विपक्ष से मुक्ति दिलानी है ,क्योंकि जब तक देश में विपक्ष है तब तक हम 'सीनेरोटा अथवा 'फ्यूहरर' नहीं न पाएंगे ! इसलिए अब हर आम और खास को एतद द्वारा सूचित किया जाता है कि वह देश को गैर भाजपा दल और धर्मनिरपेक्ष विचारों से मुक्त करने में जुट जाए ! देश की आवाम को चाहे जितनी परेशानी हो लेकिन कोई हमारे 'जुमलों' का मजाक न उडाये !क्योंकि यदि 'एक झूंठ सौ बार बोला जाये तो सच हो जाता है' तब हमारे जुमले सौ बार दुहराए जाने पर सच क्यों नहीं होंगे ?

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