ताजा-ताजा अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी कांग्रेस में ७२ बार तालियाँ पिटवाने और समस्त सीनेटर्स द्वारा नौ बार कोर्निश करवाने से गदगद मोदी जी ने वतन लौटते ही आनन -फानन खुदरा क्षेत्र में ,कृषि क्षेत्र में और रक्षा क्षेत्र में सौ फीसदी [१००%] एफडीआई को मंजूरी दे दी है। इतनी बड़ी क़ुरबानी देने के बाद भी हमारी [भारत की ] एनएसजी [न्यूक्लियर सेफ्टी ग्रुप ]में प्रवेश की बाधाएं यथावत मौजूद हैं। केवल कोरी कूटनीतिक कलाबाजी का शोर है !
मान लो कि मोदी जी एनएसजी की प्रविष्टि के लिए चीन को मना भी लेते हैं। लेकिन पाकिस्तान की चुनौती तो तब भी कायम है। अभी अभी सरताज अजीज ने खुद ही पाकिस्तान असेम्ब्ली में फरमाया है कि ''हम भारत का एनएसजी में प्रवेश रोकने में कामयाब रहे ,इंशा अल्लाह पाकिस्तान ही एनएसजी में शामिल किया जाएगा। '' हो सकता है कि सरताज अजीज कोरी गॅप नहीं हाँक रहे हैं ,उन्होंने छोटे-बड़े ५o इस्लामिक देशों को और चीन को पाकिस्तान के पक्ष में पहले ही कर लिया है। अब यह भारतीय विदेश नीति की असफलता का चरम बिंदु होगा यदि भारत को एनएसजी से वंचित रखा जाता है ! भारत में शतप्रतिशत एफडीआई खोलने तथा देश के युवाओं की नौकरी ,किसानों की आजीविका और खुदरा व्यापारियों का बिजन्मेस दाँव पर लगाने के बाद भी यदि भारत को एनएसजी से वंचित रखा जाता है तो यह न सिर्फ भारत की गरिमा के खिलाफ होगा ,बल्कि मोदी सरकार की सेहत के लिए भी अच्छा नहीं होगा ! दक्षिण एशिया के लिए और शांतिपूर्ण दुनिया के लिए भी यह वेहद खतरनाक होगा ! श्रीराम तिवारी

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