शनिवार, 6 अगस्त 2016

यह तो उनके लिए आन-बान -शान की बात है।


बहुत ही दुखद सूचना है कि  राजस्थान की एक सरकारी गौशाला में  में ५०० गायें एक साथ मार दीं गयीं गयीं ! ये गायें कैसे मरीं? क्यों मरी ? उनकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार है ? यह तो मुख्यमंत्री वसुंधरा जी ही बता पाएंगी। और यदि सचाई जानना है तो किसी ऐसे पशु चिकित्सक को खोजना पडेगा जो बिना व्यापम भृष्टाचार के ,बिना रिश्वत के और बिना किसी नेता के सहयोग के भी डॉ बन पाया हो !हालाँकि  गौलोक धाम जा चुकी 'गौमाताओं'को कोई इससे कोई फर्क नहीं पड़ताकि उन्हें किसने मारा और क्यों मारा ? लेकिन इस संदर्भमें उन सच्चे 'गौसेवकों' की भूमिका पर सभी की नजर रहेगी,जिन्होंने 'गौरक्षा 'के नाम पर कानून को अपने हाथमें ले रखाहै और देशभर में हिंसक  उपद्रव मचा रखा है।

भारत की जनता और दुनिया के तमाम शांति-प्रेमी लोग इंतजार कर रहे हैं किये 'स्वयम्भू' गौसेवक कब अपनी ५०० गौमाताओं के क्रूर हत्यारों के शीश काटकर जयपुर स्थित राजभवन के समक्ष पेश करते हैं। क्योंकि यह तो उनके लिए आन-बान -शान की  बात है। वे  जब किसी अज्ञात पशु के थोड़े से मांस के  लिए हरियाणा में किसी 'अखलाख' को मार सकते हैं । जब गुजरात में किसी बूढ़े -बीमार मृत पशु की देह उठाने वालों को , जंगल में पशु का शव फेंकने गए गरीब 'दलित बंधुओं' को महज चमड़ा उधेड़ने पर लहूलुहान कर सकते हैं ,उन्हें धर्म-परिवर्तन के लिए मजबूर कर सकते हैं ,तो ५०० गौमाताओं के हत्यारों को कैसे छोड़ा जा सकता है? यदि 'हिंदुत्व वीरों ' ने इन गौ माताओं की हत्याका बदला नहीं लिया और 'कानून को हाथ में नहीं लेने' का पाखण्ड किया तो उन्हें इसका जबाब देना होगा कि उन्होंने गुजरात में दलितों को क्यों पीटा ? उन्होंने हरियाणा में 'अखलाख को क्यों मारा ?

श्रीराम तिवारी !

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