दुनिया में सम्भवतः संघ परिवार ही ऐंसा है जहाँ पार्टी संस्थापकों की मर्मान्तक बेईज्जती की जाती है । कहने सुनने को तो संघ द्वारा निर्देशित उसकी अनुषंगिक पार्टी में एक ऐंसा मार्गदर्शक मंडल है ,जिसका न कोई मार्ग है और न जिसका कोई दर्शक है। संघी भाजपाई सत्ताखोरों ने 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा दिया , लेकिन 'कौओं के कोसने से गाय कभी नहीं मरती ',इसीलिये कांग्रेस मुक्त भारत तो नहीं हुआ और न कभी होगा ,किन्तु आडवाणी ,मुरली मनोहर जोशी अरुण शौरी,यशवंत सिन्हा जैसे संस्थापकों से जरूर भाजपा मुक्त हो गई है। राष्ट्रपति चुनाव में जो दुर्गत इन वरिष्ठों की हुई है ,वैसी हरकत विश्व इतिहास में कहीं पढ़ने -सुनने में नहीं आयी। अपने वरिष्ठों की ऐसी दुर्गत कभी हिटलर ने जर्मनी में और संजय गाँधी ने भारत में जरूर की थी।
बरसो राम झला झलियाँ ,करे किसान खाए दुनिया !
बरसो राम झला झलियाँ ,करे किसान खाए दुनिया !

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