सोमवार, 10 अप्रैल 2017

भारत के अधिकाँस दलों और नेताओं का रवैया 'अभारतीय' है।  

 
ऑस्ट्रलिया के प्रधान मंत्री मेल्कम टर्नबुल इंडिया आये। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने उनके साथ मेट्रो में सफर किया ,'अक्षर धाम मंदिर' ले गए , देवदर्शन कराये,उनके साथ नौका विहार बिहार किया ,क्रिकेट पर चर्चा की और सेल्फी भी ली !मेरे मन में सवाल उठा कि यदि लालू यादव मुख्य मंत्री होते तो क्या करते ? अवचेतन मन का जबाब था -करते क्या ?अपनी भैंसों के तबेले में ले जाते गोबर दिखलाते ,चारे पर चर्चा करते, मेल्कम टर्नबुल को सत्तू और लीची खिलाते और खुद तम्बाखू फांकते !यदि मुलायमसिंह यादव पीएम होते तो क्या करते ? जबाब हाजिर था -सैफई में मुजरा आयोजित कराते , थर्ड ग्रेट - फूहड़ डांस दिखलाते, आगरे का पेठा और मथुरा के पेढ़े खिलाते लोहियाके समाजवाद पर चर्चा करते ! यदि राहुल गाँधी पीएम होते तो क्या करते ? गाँधीजी , नेहरूजी ,इंदिराजी ,शाश्त्रीजी की समाधियों के दर्शन करानेके लिए विभिन्न घाटों पर ले जाते, सभी धर्म-मजहब-पंथ के धर्मगुरुओं सहित आस्ट्रेलिया के पीएम से 'सर्वधर्म प्रार्थना'एवं 'वैष्णव जन तो तेने कहिये जे जाने पीर पराई रे' वाला भजन गाते और निर्यात घाटे पर चर्चा करते ! यदि बहिन मायावती पीएम होती तो वे आस्ट्रेलिया के पीएम को लखनऊ ले जाकर काशीराम की प्रतिमाएं दिखातीं,पत्थरों के बड़े-बड़े हाथियों समेत खुद की विशाल प्रतिमाएँ दिखातीं , चलन से बाहर हो चुके नोटों की माला पहनातीं और ईवीएम मशीन पर चर्चा करतीं !यदि कोई वामपंथी व्यक्ति प्रधानमंत्री होता तो आस्ट्रेलिया के पीएम को भरी दुपहरी में रामलीला मैदान पर अथवा ईडन गार्डन ली जाता वहाँ दस-बीस लाख भूंखे- प्यासे किसान -मजदूरों को भाषण सुनवाता ! जैसा नेल्सन मंडेला के आगमन पर कोलकाता में हुआ था। एक तरह से भारत के अधिकाँस दलों और नेताओं का रवैया 'अभारतीय' है। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की सोच तथा कार्यशैली वियतनाम के महान नेता 'हो -चिन्ह- मिन्ह' जैसी हो तो कोई बात बने ! वरना नीरस उबाऊ भाषण सुन सुनकर हैरान परेशांन सर्वहारावर्ग को साम्प्रदायिक बाड़े में घुसने से कोई नहीं रोक सकता !  

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