रविवार, 9 अप्रैल 2017

क्या भाजपा और पीडीपी ने कश्मीर को और डूबा दिया ?


यह सुविदित है कि भारत एक महान लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। इसीलिये भारतीय संविधान के निर्देशानुसार आतंकवाद और अलगाववाद की महामारी से पीड़ित जम्मू -कश्मीर में श्रीनगर लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव कराये गए। भयावह सूचना है कि सिर्फ ६.५%  वोटिंग हुई है। कोई भी साधारण बुद्धि का इंसान यह समझ सकता है कि यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार की कार्यनीतिक असफलता है और अपने ही राष्ट्र के प्रति उनका यह अक्षम्य अपराध भी है।अर्थात  यह सत्ताधारी वर्ग द्वारा किया गया 'राष्ट्रद्रोह' है। क्या तथाकथित देशभक्त लोग और सत्ता के पिछलग्गू नर नारी इस अपराध के लिए मोदीजी या मेहबूबा मुफ्ती से ठोस सवाल करेंगे ? क्या वे कांग्रेस,वामपंथ और धर्म निरपेक्ष लोकतान्त्रिक विपक्षी दलों से उम्मीद करेंगे कि वे देश संभालें और साथ में कश्मीर भी संभालें?

यदि मोदी सरकार और मेहबूबा सरकार द्वारा यह बहाना पेश किया जाता है कि श्रीनगर के लोग, दहशतगर्दों की धमकियों से डरकर वोट डालने नहीं निकले तो यह किसकी विफलता है ? डॉ मनमोहनसिंह जब पीएम थे ,अटलबिहारी बाजपेई जब पीएम थे ,नरसिम्हाराव ,राजीव गांधी,इंदिराजी,नेहरू जब पीएम थे और जब फारुख अब्दुल्ला या उमर अब्दुला मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब भी कश्मीर में पाक प्रेरित आतंक विद्यमान था। तब भी कश्मीरी लोग आतंक के साये में जी रहे थे,लेकिन इतना कम वोटिंग[5.6%]कभी नहीं हुआ। आम तौर पर कश्मीर में ५०% से कम वोटिंग कभी नहीं हुआ। अब यदि बाकई अच्छे दिन आये हैं,तो ज्यादा प्रतिशत से,ज्यादा हर्षोंल्लास से, वोटिंग होना चाहिए था !
नोटबंदी के पक्ष में  दलील दी जाती रही है कि इससे आतंकवाद के वित्तपोषण का नाभिनाल काट दिया गया है। लेकिन जम्मू और कश्मीर में साम्प्रदायिक अलगाववादी तथा बस्तर इत्यादि में नक्सल आतंकवाद की स्थिति पहले से बदतर है। कल्पना कीजिये कि डॉ मनमोहनसिंह या राहुल गाँधी या कोई और बंदा भारत का प्रधान मंत्री होता , यह भी मान लीजिये कि भाजपा विपक्ष में होती ! तब यदि कोई कष्मीरी अलगाववादी-बदमाश पथ्थरबाज भारतीय सैनिकों का अपमान करता ,उन्हें थप्पड़ मारता ,उन्हें जूता सुंघाता ,तब भाजपा एवं संघ परिवार वालों की क्या प्रतिक्रिया होती ? तब स्मृति ईरानी हरी-हरी चूड़ियां लेकर राहुल गाँधी या मनमोहनसिंह को पहनाने के लिए लालायित होतीं और तब मोदी जी का सीना भी ५६ इंच का होता ! अभी अभी चंद रोज पहले जब कश्मीर में सीआरपीएफ के जवानों का अपमान हुआ तब किसी 'सत्ताभक्त' का सीना इस लायक नहीं दिखाकि मीडिआ में मुँह भी दिखा सकें ! कुछलोग जो आर्मी के इस अपमान से आहत हैं ,वे सेना के टेंक के आगे किसी अलगाववादी को घिसटते देख बड़ा आत्मसंतोष अनुभव कर रहे हैं ! कुछलोग कष्मीरी पत्थरबाजों के अनैतिक और देशद्रोह पूर्ण आचरण की तुलना जाट आरक्षण आंदोलन कारियों और पटेल आंदोलन कारियों द्वारा की गयी पुलिस की पिटाई से कर रहे हैं।कुछ लोग मुंबई सहित देश भर में फैले 'अंडर वर्ल्ड' द्वारा पुलिस की बेइज्जती से तुलना कर रहे हैं। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि जहाँ -जहाँ संघ की ताकत बड़ी है वहाँ -वहां पुलिस का आत्मसमान नदारद है। बल्कि लगता है कि संविधान ही 'निलंबित ' है।

सारा संसार जानता है कि कष्मीरी पत्थरबाजों के हाथों पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ परोक्ष युद्ध छेड़ रखा है !दुनिया का जो व्यक्ति इस सिद्धांत को नहीं मानता वह भारत का मित्र नहीं हो सकता। कश्मीर घाटी में आईएसआईएस और पाकिस्तान की पकड़ इतनी मजबूत है कि फारुख अब्दुल्ला और उनका बेटा उमर अब्दुला भी अलगाववादियों के पैरोकार बने हुए हैं। भाजपा के सहयोग से कष्मीर पर राज कर रही मेहबूबा मुफ्ती भी अलगाववादियों के बजाय भारतीय सेना की ही आलोचना किये जा रही है। कश्मीर में लगातार भारतीय सैनिकों को अपमानित किये जाने के बाद भारतकी जनताने और सेनाने जो धैर्य दिखायाहै वो कबीले तारीफ है। सेना के लिए इजरायल में दस्तूर है कि कोई यदि एक इजरायली सैनिक को मार दे तो बदले में सौ दुश्मन तत्काल मारे जायेंगे!इंग्लैंड रूस, अमेरिका,जापान और चीन में सेनाको बेहतर सम्मान प्राप्त है ,जबकि भारतीय सेना को हमेशा 'अहिंसा परमोधर्म:' के अनुसार चलना पडता है।भारतीय फौज को बाढ़ में मदद के बदले ,अलगाववादी लफंगों के थप्पड़ खाने पड़ रहे हैं। इसके वावजूद कुछ लोग सोशल मीडिया पर लगातार सरकार की आलोचना के बहाने  भारतीय सेना को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं यह वतन के साथ सरासर गद्दारी ही। जोलोग कश्मीरकी असल तासीर से वाकिफ नहीं और भारतीय सेनाकी ओर अंगुली नहीं उठा रहे हैं वे मेरी नज़र में परवेज मुसर्रफ और हाफिज सईद के ! लोग अलगाववादियों के पैरोकार हैं वे ज्यादा
भारतीय सेना को बदनाम करने वाला शख्स भारत का मित्र नहीं हो सकता।
जबसे स्वयंभू राष्ट्रवादी लोग देश की सत्ता में आये हैं, कश्मीर की घाटी में घोर अशांति है। यह शैतान की छाया है। या 'राष्ट्रवाद' की माया है ? किस मुँह से कहते फिरते हैं बड़बोले लोग कि ७० साल में कष्मीर में अमन के लिए कुछ नहीं  किया गया ?अरे मूर्खो पहले कष्मीरी पत्थरबाजों से तो पूंछो वे अमन चाहते भी हैं, या वे भी पाकिस्तानी आतंकियों की तरह आईएसआईएस की नाजायज औलाद कहलाना चाहते हैं। बड़ी डींगे हांकीं गयीं कि अब असली 'देशभक़्त लोग सत्ता में आ गए हैं तो सब कुछ ठीक कर देंगे ? क्या आपके बदलाव का आशय यही है कि पहले तो केवल कुछ दस बीस अलगाववादी ही पत्थरबाजी किया करते थे ,लेकिन अब अधिकांश कश्मीरी जवान औरतों और कालेज की छात्राओं को भी पत्थरबाजी का चस्का लग चुका है !

सिर्फ कश्मीर ही नहीं, बस्तर ही नहीं बल्कि सारे मुल्क में इन दिनों अंधेरगर्दी का साम्राज्य पसरा हुआ है। दुष्मनी के सिवा अब हमारा पाकिस्तान और चीन से शायद कोई संबंध नहीं रह गया है। चीन ने भारतीय प्रान्त अरुणाचल के शहरों के नाम तक  बदल डाले हैं। कष्मीर के अधिकाँस पुलिस थाने बंद हो चुके हैं। बस्तर -सुकमा में भारतीय सीआरपीएफ के जवान मौत के घाट उतारे जा रहे हैं। लेकिन भाजपा और मोदी जी को शायद कोई खास चिंता नहीं है। उन्हें तो बस केवल कांग्रेस मुक्त भारत चाहिए ! वे नहीं जानते कि क्या वजह है कि कष्मीर में कम वोटिंग क्यों हुआ ? जबकि सभी जानते हैं कि श्रीनगर में अभी जब दुबारा वोटिंग हुई तब भी लोग घरों से नहीं निकले ! क्या जम्मू कष्मीर की इतनी बुरी हालत पहले कभी थी ?डॉ मनमोहन सिंह या उनसे पहले के पीएम और कष्मीर के सीएम उमर अब्दुला भी इतने नाकारा नहीं थे ! कश्मीर की मुख्यमंत्री महोदया आदरणीय मेहबूबा मुफ्तीजी, पहले आप बजा फरमाएं कि आपने कष्मीर की सत्तामें आकर क्या किया ? मोदीजी और भाजपा नेता बताएं की उन्होंने और पीडीपी ने कश्मीर और भारत देश को ऐंसा क्या दिया जो पहले और किसी ने नहीं दिया ? यदि आप के पास जबाब नहीं तो नोट कीजियेगा मैं बताता हूँ ! भारत की आजादी के बाद कश्मीर में ऐंसा पहली बार हुआ है कि भारतीय सेनाको जूते चप्पलों से पीटा गया !कश्मीर में ऐंसा पहली बार हो रहा है कि जवान लडकियां भी पत्थरबाजी कर रही हैं ! ऐंसा पहली बार हो रहा है कि नोटबंदी के वावजूद उधर हरेक के पास नए नोट इफरात में हैं !ऐंसा तब हो रहा है जब केंद्र मेंअब तक के 'सबसे लोकप्रिय' प्रधान मंत्री हैं और कष्मीर में उनके सहयोग से मेहबूबा मुफ्ती की सरकार है !

सारा राष्ट्र  सो रहा है !कोई नहीं पूंछ रहा है कि मोदी जी बस्तर में सीआरपीएफ के दर्जनों जवानों को बेमौत क्यों मरना पड़ा ?जब आपकी नोटबंदी सफल रही और आप हरजगह दनादन जीत भी रहे हैं तो ये बस्तर के नक्सली, धन कहाँसे प्राप्त करते हैं ?उनके पास आधुनिक हथियार क्यों हैं? वे सही सलामत क्यों हैं ?
अब कोई देशभक्त नहीं पूंछ रहा कि जब केंद्र में शानदार बहुमत वाली 'राष्ट्रवादियों'की सरकार है,तो कश्मीर में आग क्यों लगी है ? वर्तमान मोदी सरकार ने और मेहबूबा सरकार ने पहले की अपेक्षा ऐंसा क्या किया कि वो काबलेतारीफ हो ?असफल होकर इस्तीफे के बहाने खोजना और इस्तीफे की धमकी देना कोई तुक की बता नहीं है !

हालाँकि मेहबूबा मुफ्ती की यह स्तीफे वाली धमकी कुछ तो असर कर गयी ! तभी तो केंद्र सरकार और पीएम की रजामंदी से आनन् फानन पांच हजार पुलिस पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरूं की गयी। और जिन युवाओं के हाथों में भारतीय सेना और पुलिस के खिलाफ केवल पत्थर हुआ करते थे उनमें से हजारों युवा श्रीनगर के बख्सी स्टेडियम में टूट पड़े! इनमें से कुछ युवाओं का कहना है कि हमने पैसे के लिए ही पत्थर उठाये थे ,और अब पैसे के लिए ही पुलिसकी नौकरी भी स्वीकार है !


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