बुधवार, 11 जनवरी 2017

देशभक्त फौजियों- किसान मजदूर तुम्हारे साथ है।

पाकपरस्त आतंकियों ने उड़ी ,उधमपुर और अन्य भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों पर छुपकर हमले किये हैं और उनके हमले अब भी जारी हैं। भारत के फौजी जवान रोज 'शहीद' हो रहे हैं। लेकिन सर्वाधिक शर्मनाक स्थिति वह है जब सीमा पर हमारे फौजी जवान भूँखे प्यासे बिना लडे ही मर रहे हों ! कुछ फौजी अफसर ,नेता और बिचोलिये किस कदर भृष्टाचार में लिप्त हैं यह आगस्ता हेलीकाप्टर काण्ड से बखूबी समझा जा सकता है। भारतीय फ़ौजमें कतिपयअधिकारी वर्ग द्वारा बीबियों की अदलाबदली के चर्चे पहले भी सुने जाते रहे हैं ,किन्तु वर्तमान तेवर क्या हैं यह इंदौर -महू के भुक्तभोगी अच्छी तरह जानते हैं। बुन्देली कहावत है ''धन्य कुची तारो ,बिलैया लेगई पारो !''

चीन-पाकिस्तान की  बॉर्डर पर अपना शौर्य  दिखाने के बजाय महू आर्मी के प्रशिक्षु अधिकारी शराबखोरी और आदतन -निर्दोष नागरिकों को पीटने के लिए मशहूर रहे हैं। वे लड़कियों और ओरतों को छेड़ते हैं ,यदि पुलिस और नागरिक कुछ आपत्ति करें तो 'विजयनगर थाने' की ऐंसी तैसी कर देते हैं। अभी तक तो इंदौर की जनता ने वर्तमान सैन्य बलों का यही शौर्य देखा है।जिन लोगों ने  १९६२-१९६५और १९७१ के जाबांज फौजियों को देखा है , उनके शौर्य को देखा है,वेमौजूदा हालात से दुखी हैं।

वर्तमान में भारतीय सैन्यबलों की हालात अत्यंत दयनीय है। उन्हें भरपेट खाना नहीं मिल रहा है।उन्हें अधपेट रहकर सीमाओं पर दुश्मन से लड़ना पड़ता है और अपने अफसरों के जूते पालिस से लेकर उनके कुत्तेकी सेवा तक करनी पड़ती है। जब वे शोषित -पीड़ित फौजी अपनी आपबीती फेसबुक या वाट्सएप पर भेजते हैं तो उनके मोबाइल छीन लिए जाते हैं। कोर्ट मार्शल की धमकी दी जाती है। एक तरफ तो पीएम साहब  खुद ही डिजिटल इंडिया की बात करते हैं और  कहते हैं कि हर काम के लिए मोबाइल का उपयोग करो। दूसरी तरफ देश केही जांबाज फौजियों  को उस सुविधा से वंचित किया जा रहा है। अपनी बदतर हालात को यदि किसी फौजी जवान ने अपने बीबी बच्चों को बता दिया तो उसपर इतना आतंक क्यों फैलाया जा रहा है। ढंग का खाना नहीं मिलने की शिकायत ही तो की है। उसकी शिकायत भी सही है उसमें शक की गुंजायश क्या है ? कौन नहीं जानता कि सेना  के हिस्से का अधिकांस खादयान्न और अन्य सन्साधन ब्लेक मार्केट में बेचे जाते हैं। यदि किसी फौजी जवान ने  'अंदर की पोल ' खोल दी तो 'नकली देशभक्तों' की उथली देशभक्ति पर पाला क्यों पड़ गया है ? शिकायतकर्ता फौजी जवान का स्थानांतरण क्यों किया ? कार्यक्षेत्र क्यों बदल दिया ? फौजी अफसरों और गुनहगार नेताओं पर ठोस कार्यवाही क्यों नहीं की जाती ? देशभक्त फौजियों ! आप अपने हक़ के लिए ,अपने सम्मान के लिए, अपनी आवाज बुलन्द करो- देश की मेहनतकश जनता और किसान मजदूर तुम्हारे साथ है।

भारत के कुछ दकियानूसी फेस बुकिये ,कुछ अगड़म-बगड़म पत्रकार और उथले साम्प्रदायिक नेता बात-बात में 'गांधी' शब्द से चिढ़ते हैं। जो लोग अपने बाप को बाप नहीं मानते वे ,महात्मा गाँधी याने बापू को 'राष्ट्रपिता' क्यों मानेगे ?  हरियाणा के कुख्यात मंत्री अनिल बिजने स्वीकार किया कि भविष्य में नोटों पर 'गाँधी' नहीं होंगे !उनके इस कथन पर गाँधीजी के प्रपौत्र की प्रतिक्रिया काबिले गौर है ! उनका सुझाव है 'चूँकि इस दौरमें वैसेभी नोटबंदी के बहाने बापूके चित्रकी दुर्गति हो रहीहै इसलिए आइंदा नए नोटों पर बापूका नाम और चित्र न छापा जाए बल्कि किसी 'महाभृष्ट नेता' का नाम और फोटो छापा जाए। देश की जनता को मालूम हो कि 'बापू' के हत्यारों के वंशज परवान चढ़ रहे हैं।  रिजर्व बैंक की स्वायत्तता खत्म हो चुकी है। अब संसदीय लोकतंत्र की नाक भाइयो -बहिनों के हाथ में है ! 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें