रविवार, 22 जनवरी 2017

'हुआ-हुआ' पर क्या हुआ ?


 यदि कांग्रेस सपा के साथ या सपा कांग्रेस के साथ विश्वासघात न करे तो सपा रुपी 'काठ की हाँड़ी' दूजी बार भी सत्ता के चूल्हे पर चढ़ सकती है। गठबंधन के नेता अखिलेश यादव अपने सभी प्रतिद्वंदियों से कई गुना बेहतर है।\

फेसबुक पर अक्सर अच्छी पोस्ट पर कम 'लाइक' मिलते हैं,,जबकि घटिया और वाहियात मुद्दे पर ढेरों लाइक मिलने लगते हैं। इसको इस मेटाफर से समझें कि कुँजड़े की दुकान पर या किराने की दुकान पर हमेशा भीड़ रहती है ,जबकि जौहरी की दुकान पर कभी- कभार इक्का -दुक्का ही पहुँच पाते हैं।  पर क्या हुआ ?

यदि लोकतंत्र को भीड़तन्त्र से बचाना है तो आस्था,पाखण्ड और परम्पराओं से ऊपर राष्ट्र के संविधान को मानना ही होगा। जल्लीकट्टू को लेकर तमिल युवा पागलपन और उन्माद से ग्रस्त हैं। उन्हें संविधान की फ़िक्र नहीं है।

जंगल में एक परंपरा है की जब किसी स्यार की जुबान में खुजली होती है तो हुआ-हुआ करता है। जब कभी एक स्यार  'हुआ' बोलता है तो बाकी के सभी स्यार भी  'हुआ-हुआ' करने लग जाते हैं। सारा जंगल 'हुआ-हुआ' के शोर में डूब जाता है। ;क्या हुआ ?यह किसी को नहीं मालूम !

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