यदि कोई फिल्म निर्माता निर्देशक यथार्थ पर आधारित कलात्मक अथवा मनोरंजनीय फिल्म बनाता ,यदि उसमें शाहरुख खान ,संजय भंसाली, सलमान खान की तरह पैसा कमाने की अनलिमिटेड टुच्ची भूंख नहीं होती तो मैंभी उनके अधिकारों की पैरवी करता। यदि मुझे यकीन होता कि संजय भंसाली ने शाहरुख़ खान ,सलमान खान की तरह जानबूझकर अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट को विवादास्पद नहीं बनाया है,यदि मुझे यकीन होता कि संजय लीला भंसाली ने राजपूतों की -कर्णी सेना को जानबूझकर नहीं उकसाया है ,यदि मुझे मालूम होता कि मार-कुटाई की यह घटना फ़िल्मी 'टोटका'नहीं है ,तो देश के तमाम कलाप्रेमियों की तरह मैं भी उसकी अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता का पक्षधर होता।लेकिन मुझे मालूम है कि कर्णी सेना तो सिर्फ कानूनी तौर पर गलत है किन्तु भंसाली ने अपनी 'माँ ' को ही गाली दी है। भंसाली का यह अक्षम्य अपराध है। फिल्म इंडस्ट्रीज ने अंडर वर्ल्ड का सहारा लेकर पहले भी देश के साथ हमेशा विश्वासघात किया है। अब बाजारीकरण के इस दौर में तमाम फिल्म वाले अब नफा कमाने के लिए इतिहास का मजाक उड़ा रहे हैं ! वेशक करनी सेना को कानून हाथ में नहीं लेना था किन्तु जब किसी की कोई नहीं सुनता तो सब यही रास्ता अख्तयार करते हैं। हालांकि इस घटना से फायदा भंसाली को ही होगा !
शनिवार, 28 जनवरी 2017
फायदा भंसाली को ही होगा !
यदि कोई फिल्म निर्माता निर्देशक यथार्थ पर आधारित कलात्मक अथवा मनोरंजनीय फिल्म बनाता ,यदि उसमें शाहरुख खान ,संजय भंसाली, सलमान खान की तरह पैसा कमाने की अनलिमिटेड टुच्ची भूंख नहीं होती तो मैंभी उनके अधिकारों की पैरवी करता। यदि मुझे यकीन होता कि संजय भंसाली ने शाहरुख़ खान ,सलमान खान की तरह जानबूझकर अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट को विवादास्पद नहीं बनाया है,यदि मुझे यकीन होता कि संजय लीला भंसाली ने राजपूतों की -कर्णी सेना को जानबूझकर नहीं उकसाया है ,यदि मुझे मालूम होता कि मार-कुटाई की यह घटना फ़िल्मी 'टोटका'नहीं है ,तो देश के तमाम कलाप्रेमियों की तरह मैं भी उसकी अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता का पक्षधर होता।लेकिन मुझे मालूम है कि कर्णी सेना तो सिर्फ कानूनी तौर पर गलत है किन्तु भंसाली ने अपनी 'माँ ' को ही गाली दी है। भंसाली का यह अक्षम्य अपराध है। फिल्म इंडस्ट्रीज ने अंडर वर्ल्ड का सहारा लेकर पहले भी देश के साथ हमेशा विश्वासघात किया है। अब बाजारीकरण के इस दौर में तमाम फिल्म वाले अब नफा कमाने के लिए इतिहास का मजाक उड़ा रहे हैं ! वेशक करनी सेना को कानून हाथ में नहीं लेना था किन्तु जब किसी की कोई नहीं सुनता तो सब यही रास्ता अख्तयार करते हैं। हालांकि इस घटना से फायदा भंसाली को ही होगा !
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें