गुरुवार, 26 जनवरी 2017

सहज,सरल और तरल जीवन !



आपकी विद्वत्ता इससे नहीं मानी जायेगी किआप कितना अधिक पढ़े-लिखे हैं ?आप कितने बड़े ज्ञानी या विद्वानहैं यह इससे मूल्यांकित नहीं होगा कि आप कितने महान गणितज्ञ हैं ?आपकी विद्वत्ता इससे सुनिश्चित नहीं हो सकती कि आपने दर्शनशास्त्र,समाज शास्त्र ,मनोविज्ञान,भूगोल,अंतरिक्ष विज्ञान ,परमाणु विज्ञान,भाषा विज्ञान ,व्याकरण,  नृतत्व समाजशास्त्र,भूगर्भशास्त्र ,चिकित्साविज्ञान का कितना अध्यन किया है ? आपने ईश्वर,धर्म,मजहब ,अध्यात्म और राजनीतिशास्त्र पर कुंटलों कागज काले क्यों न कर डाले हों ? आपका संचित ज्ञानकोष कितना चाहे कितना ही समृद्ध क्यों न हो ?यदि आप किसी रोते हुए बच्चे को हँसा नहीं सकते ,यदि आप अपने ही सपरिजनों या बुजुर्गों को खुश नहीं कर सकते ,यदि आप खुद भी खुशियों से महरूम हैं ,तो आपका संचित ज्ञानकोष आपके लिए भी जहर ही है। आप तत्काल उससे मुक्त हो जाइये ! आप सहज,सरल और तरल जीवन जीने की कोशिश कीजिये !यदि आप वास्तव में ज्ञानी हैं तो किसी भी व्यक्ति,विचार अथवा वस्तु के व्यामोह से बचिए और अहं का बोझ भी तत्काल उतारकर फेंक दीजिये ! श्रीराम तिवारी !  

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