पाकिस्तान में एक हफ्ते में ५ वाँ आतंकी हमला !दरगाह में आईएस आतंकी ने खुद को उड़ाया! १०० मरे और १५० गंभीर रूप से घायल ! पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा -'हर एक बूँद का बदला लिया जाएगा !' अखबार में इन पंक्तियों को पढ़ने की बाद ,मेरी पहली प्रतिक्रिया यही है कि 'दिवंगतों के प्रति शोक संवेदना प्रकट करता हूँ और आतंकवाद की निंदा करता हूँ !'बहुत सोचा लेकिन मुझ अल्पबुद्धि को कुछ समझ नहीं आया कि ये पाकिस्तानी जनरल किससे बदला लेने की बात कर रहा है ? यह तो वही बात हुई कि अपने बच्चों के हाथों में किताब कॉपी देने के बजाय पहले तो एके ४७ और क्लाशिनकोव पकड़ा दी ,और जब बच्चों ने घर में ही खून की होली खेलना शुरूं कर दिया तो बच्चों के अब्बा हुजूर पडोसी को गालियाँ देने लगे।
पाकिस्तानी हुक्मरानों की असल समस्या यह है कि उनसे अपना देश सम्भलता नही और वे दुनिया भर में आतंकबाद के निर्यात की तिजारत करने पर तुले हैं। यह उसी कट्टरतावाद का प्रतिफल है कि एक अकेले फिदायीन 'आईएसजादे'ने एक झटके में पूरे १०० हलाल कर दिए। पाकिस्तानी हुक्मरान और आतंकी इस नृशंस नरसंहार का ठीकरा भारत के सिर फोड़ देते लेकिन हमलावर की पहचान तुरन्त जाहिर हो गयी कि वह 'ईएस आई एस' का पट्ठा था। यह हमला सूफी सन्त की दरगाह पर हुआ है जो शियाओं के एक विशेष पर्व पर किया गया है। इस नर संहार पर जो लोग चुप हैं ,वे कौन हैं ?..वे कौन [जादे]कहे जाएंगे ? भारत के चप्पे -चप्पे में और कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादी रोज हमले कर रहे हैं ,किन्तु हमारे विद्वान साथी सिर्फ 'मोदी-मोदी'में पगला रहे हैं। वे पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ एक शब्द भी खर्च नहीं करते।जब हरियाणा में 'रामजादों'द्वारा एक निर्दोष अखलाख को मारा,तब हमने जमकर कोसा था,अपने तमगे लौटा दिए थे। अब पाकिस्तान में एक अकेले ने ही १०० मार डाले,इस नर संहार की निंदा करने में क्या समस्या है ? भारत के धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवी कहाँ हो ?
वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान की राज्य सत्ता और एटामिक हथियारों के ज़खीरे पर दहशतगर्दों का कब्ज़ा होगा। नफ़रत और कट्टरता की बुनियाद पर बने इस देश का शायद यही हश्र होना था। पाकिस्तान की समस्या का हल दुनिया की किसी महाशक्ति के पास नहीं। चीन, रूस और अमेरिका की दिलचस्पी सिर्फ इस मरते देश की खाल नोच लेने भर में है। पाकिस्तान की मेहनतकश अमन पसन्द आवाम को इतना बुजदिल और कायर नहीं होना चाहिए कि आतंकियों के मजहबी लीडर खुले आम सड़कों पर हथियारों के साथ जुलुस या सभाएं करते रहें और आम आदमी तमाशा देखता रहे। पाकिस्तान के अमनपसन्द लोग चाहें तो पाकिस्तान में 'भारत विरोध' की उन्मादी लहरों को रोक सकते हैं। खूनी आतंक की इस समस्या को उन्हें गंभीरता से लेना ही होगा।भारत के जो लोग आतँकवाद से दहकते पाकिस्तान को देखकर पुलकित हो रहे हैं वे यदि अपने विवेक का उपयोग करेंगे तो पाएंगे कि एक शांत समृद्ध और खुशहाल पाकिस्तान ही भारत के लिए मुफीद है। यदि पड़ोस के घर में आग लगी हो तो चैन से कोई पागल ही सो सकता है। पाकिस्तान में उठ रही आतंकी आग की लपटें ,भारत को नहीं झुलस पाएंगीं ,इसकी क्या गांरटी है ? भारत का अभिन्न अंग जम्मू और कश्मीर तो १९४७ से ही सुलग रहा है।
पाकिस्तान में धधक रही मजहबी आतंक की आग को बुझाये बिना दक्षिण एशिया में स्थायी अमन का दूसरा कोई विकल्प नहीं। कट्टरतावादी उन्मादी आग को बुझा पाना अकेले पाकिस्तान के वश में नहीं है। यह आग तभी बुझ सकती है जब विश्व विरादरी यह कबूल करे कि इस आग को भड़काने में अमेरिका और चीन का विशेष हाथ है !आतंक के भुक्तभोगी भारत और अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के हुक्मरानों ने जो दुराभांति की उसका ही परिणाम है कि अब पाकिस्तान धधक रहा है । भारत अफगानिस्तान जैसे पड़ोसियों के आपसी सहयोग से ही यह आग बुझ सकती है !चीन अमेरिका और रूस के भरोसे पाकिस्तान विनाश की ओर बढ़ रहा है। हमें पाकिस्तान की बदतर स्थिति से खुश होने की कोई ज़रुरत नहीं,क्योंकि पाकिस्तान अगर जलेगा तो आँच भारत पर अवश्य आएगी। श्रीराम तिवारी

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