जो शख्स आलोचना ,समालोचना और प्रत्यालोचना के अंतर को समझता है ,जिसका नजरिया प्रगतिशील और सोच 'साइन्टिफ़िक' है, उसके द्वारा सोशल मीडिया पर प्रस्तुत आलोचना सार्थक एवम तार्किक हुआ करती है। किन्तु जो लोग आलोच्य विषय में निष्णान्त नहीं हैं और बिना पढ़े ही नकारात्मक टिप्पणी करते रहते हैं ,उनकी मशक्कत निरर्थक है। जो लोग वैचारिक प्रतिबध्दता के वशीभूत इकतरफा और व्यक्तिगत अंध आलोचना में ही व्यस्त हैं ,वे ओसीडी [आफसेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर] से ग्रस्त हैं। ऐंसे लोगों से हमेशा बचना चाहिए !
शनिवार, 18 फ़रवरी 2017
जो शख्स आलोचना ,समालोचना और प्रत्यालोचना के अंतर को समझता है ,जिसका नजरिया प्रगतिशील और सोच 'साइन्टिफ़िक' है, उसके द्वारा सोशल मीडिया पर प्रस्तुत आलोचना सार्थक एवम तार्किक हुआ करती है। किन्तु जो लोग आलोच्य विषय में निष्णान्त नहीं हैं और बिना पढ़े ही नकारात्मक टिप्पणी करते रहते हैं ,उनकी मशक्कत निरर्थक है। जो लोग वैचारिक प्रतिबध्दता के वशीभूत इकतरफा और व्यक्तिगत अंध आलोचना में ही व्यस्त हैं ,वे ओसीडी [आफसेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर] से ग्रस्त हैं। ऐंसे लोगों से हमेशा बचना चाहिए !
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