गुरुवार, 2 मार्च 2017

''तुलसी हाय गरीब की ,कबहुँ न निष्फल जाय'' !

घास के कई प्रकारकी होती हैं ,उत्तर भारत में मुशयाल,गौनैय्या ,कांदी ,काँस और गाजरघास इत्यादि प्रमुख हैं ! काँस और गाजरघास कोई पशु भी नहीं खाता। अधिकान्स ढोरोपयोगी घास तभी उगती है जब धरतीमें पर्याप्त नमी हो या वर्षात का मौसम हो। किन्तु काँस और गाजरघास को कुदरत ने शायद अमरत्व प्रदान किया है, कि वे  किसीभी जगह,किसीभी मौसममें, बिना सिचाई के,बिना देखभाल के,अपने आप बढ़ते रहते हैं। इसी तरह दुनिया के कुछ धर्म- मजहब स्वतःस्फूर्त रूप से कट्टरवादी हैं। वे अपने आप परवान चढ़ते रहते हैं, क्योंकि उनपर शैतान सवार  है। इन कट्टरपंथी साम्प्रदायिक संगठनों को खत्म करने की कोशिश बेकार है। ये  रक्तबीज हैं.ये तो 'काटे पै कदरी फरे' के उदाहरण हैं। इन्हें काटोगे तो और ज्यादा कोंपलें फूटने लगेंगी। इन मजहबी और साम्प्रदायिक कट्टरपंथियों पर, साम्प्रदायिक संगठनों पर शैतान हमेशा प्रशन्न रहता है। इसीलिये कभी वे सलमान रुश्दी के सिर काटने का इनाम और फतवा जारी करते हैं ,कभी वे केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का सिर काट कर लाने का इनाम घोषित करते हैं।

 नियति का सिद्धांत है कि समय किसी का सदा एक सा नहीं रहता। १२ साल में घूरे के भी दिन फिरते हैं। विगत  ढाई-तीन साल से देश में सहिष्णुता,धर्मनिपेक्षता और मेहनतकशों की विचारधारा पर निरन्तर हमले होते रहे हैं। इस हमले में धर्म-मजहब का चोला ओढ़ने वाले अधिकान्स बाबा -स्वामी भी शामिल रहे हैं! लेकिन सुखद खबर यह है कि स्वामी रामदेव अब सोच समझकर बोलने लगे हैं ,यूपी के चुनावमें उन्होंने किसीका साथ नहीं दियाहै। उन्होंने जनता को लोकतंत्र की असल ताकत बतायाहै। उनकी जय हो !श्री श्री श्री रविशंकर जी  जबसे बस्तर की यात्रा से लौटे हैं काफी गंभीर दिख रहे हैं। दो मार्च को प्रकाशित स्थानीय दैनिक प्रभातकिरण के  फ्रंट पेज पर श्री श्री का बयान मेरे दिल को छू गया।उनके बयान का सार यह है -[१]जयंती ,पुण्यतिथि पर छुट्टियाँ बंद करो। [२]जात -पांत, धर्म-मजहब पर वोट मांगना बन्द करो।[३] लोकतंत्र में वामपंथ और दक्षिणपंथ सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है,कोई भी इसे छीन नहीं सकता ! जय हो ! यदि श्री श्री पर किसी राजनीतिक स्वार्थ का कोई भूत सवार न हुआ हो, और उनपर नक्सलवादियों का असर न हुआ हो ,तो उनका यह हृदय परिवर्तन स्वागत योग्य है ! लेकिन  वे यदि अपने कारपोरेट सिस्टम को बस्तर से लेकर पाकिस्तान में फैलाने के लिए धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुतासमर्थन का स्वांग धारण कर रहे हैं ,तो 'खुदा' या ईश्वर भले ही उन्हें माफ़ कर दे, किन्तु ''तुलसी हाय गरीब की ,कबहुँ न निष्फल जाय''  !  श्रीराम तिवारी    

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