शुक्रवार, 3 मार्च 2017


उज्जैन के जिस 'संघ सह प्रचारक' डा.कुंदन चंद्रावत ने केरल के मुख्यमंत्री 'पिनराई विजयन' का सिर काटने का इनाम घोषित किया था, संघ ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया है।संघियों को अक्ल आई,धन्यवाद ! उज्जैन की पुलिस ने डॉ कुंदन चंद्रावत पर धारा ५०५ के तहत कायमी की है। जो 'नकली देशभक्त' शोसल मीडिया पर और टीवी चेनल्स पर, वामपंथ तथा केरल सरकार के खिलाफ लगातार अरण्यरोदन किये जा रहे हैं ,वे ज़रा रुककर सांस लें लेवें । उनके लिए आज की नई दुनिया के फ्रंट पेज पर दुखद खबर यह है कि 'संघ' के शीर्ष नेतत्व ने डा. चन्द्रावत को बाहर करने के साथ -साथ, केरल की तथाकथित रक्तरंजित खबरों पर भी यूटर्न ले लिया है। केरल के प्रमुख 'संघ प्रचारक' ने खुद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ की है।वहाँ जिन झड़पों को साम्प्रदायिक रंग दिया जा रहा है उनमें संघ के सदस्य नही बल्कि तश्कर,स्मगलर और बम बनाने वाले अपराधी अपनी मौत मरे हैं। माकपा और केरल सरकार को बदनाम करने से 'संघ परिवार' के नम्बर नहीं बढ़ने वाले,शायद संघ के वरिष्ठों को यह समझ है ! चूँकि 'हिंदुत्ववादी' अभी तक गाँधीजी की हत्या से मुक्त नहीं हो पाए हैं ! शायद इसी वजह से राकेश सिन्हा, संबित पात्रा ,किरण रिजूजी,अनिल बिज पर अभी भी वामपंथ की सवारी जारी है।
 
अपनी किशोरवय में हम जब कभी किसी से लड़ते -झगड़ते थे, तो हमारे बुजुर्ग नसीहत दिया करते थे कि -
''दुश्मनी जबभी करो, जमकर करो ,किन्तु यह ध्यान रहे कि जब कभी जिंदगी में मिलना पडे, तो  शर्मिंदा न हों !''

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