बुधवार, 8 मार्च 2017

शुक्रिया जनाब सरताज अहमद साहिब !


श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जबसे भारत के प्रधान मंत्री पद का भार ग्रहण किया है ,तबसे उन्होंने उतने ही शब्द मुखरित किये हैं,जितने कि आसमान में तारे हैं। वेशक उनका प्रत्येक शब्द बड़े काम का हुआ करता है,लेकिन व्यक्तिगत रूप से उनका एक भी शब्द मेरे किसी काम का नहीं। मुझे अभीतक एकभी निर्धन किसान,मजदूर या वेरोजगार नौजवान नहीं मिला जिसने स्वीकार किया हो कि मोदी जी के सत्ता में आने से या उनके 'बोल बच्चन' से उसे कुछ हासिल हुआ हो या उसके अच्छे दिन आये हों ! इस मामले में सिर्फ मोदीजी ही अनोखे नहीं हैं कि वे जिस पार्टी के नेता रहे हैं ,प्रधानमंत्री भी जैसे सिर्फ उसी पार्टी के होकर रह गए हैं। गैर भाजपाई जनता को और विपक्ष को सिर्फ जुमलों,अनैतिक हमलों का बोझ ढोना पड़ रहा है।

वैसे आजादी के बाद पं नेहरू को छोड़कर शायद ही ऐंसा कोई प्रधान मंत्री हुआ हो जिसने भारतीय लोकतंत्र की परवाह की हो ! लाल बहादुर शास्त्री जी अवश्य कुछ लोकतान्त्रिक व्यक्ति थे किन्तु वे शीघ्र ही स्वर्ग सिधार गए ! उनके बाद के अधिकांस प्रधानमंत्रियों की यह विशेषता रही है कि जिस पार्टी ने उन्हें  संसदीय दल का नेता या  पीएम् बनाया,वे उसीके होकर रह गए। इंदिराजी ने और राजीवजी ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, हम उनके प्रति युगों-युगों तक आभारी रहेंगे ,किन्तु विपक्ष के प्रति और असहमतों के प्रति उनके मन में भी दुराव कम नहीं था ! भारतीय लोकतंत्र की यह दुखद बिडम्बना रही है कि जो भी सत्तामें आया सिर्फ अपनी पार्टी का ही होकर रह गया । पार्टीहित साध्य हो गया ,देश -समाज और आवाम उसके लिए सिर्फ साधन बनकर रह गए !

लखनऊ में मारा गया आतंकी सैफुल्लाह इस्लाम के नाम पर कलंक कहा जा सकता है। भारत में अब सैफुल्लाह शब्दभी कसाबकी तरह अपवित्र होगया,किन्तु उसके 'वालिद' सरताज अहमदका नाम,दीन ए इस्लामके इतिहास में और भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर लिखा जाएगा। जनाब सरताज अहमद ने अपने आतंकी बेटे का शव ठुकराकर उन लोगों को जूता सुंघाया है,जिन्हें दुनिया का हर मुसलमान आतंकी नजर आता है। उनके इस निर्णय से उन लोगों को भी नसीहत मिली जो यह मान बैठे हैं कि भारत में आतंकवाद है ही नहीं और  बेकसूर लोगों को सताया जा रहा है। शुक्रिया जनाब सरताज अहमद साहिब !

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